
साल 2025… और सूरत का कपड़ा उद्योग अब तक के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है।
बांग्लादेश से जुड़ी सलाई चेन अचानक ठप होने से सूरत के कारोबार पर ऐसा असर पड़ा है जिसने पूरे टेक्सटाइल इकोसिस्टम की रफ्तार रोक दी है।
बांग्लादेश में बिगड़ती स्थिति का सीधा असर सूरत के व्यापारियों पर पड़ा है।
करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान अटका हुआ है, जिससे हजारों व्यापारियों की नींद उड़ गई है।
सूरत से 700 से 800 कपड़ा व्यापारी कोलकाता के रास्ते बांग्लादेश में साड़ी, लेस मटीरियल और अन्य कपड़ों की सप्लाई करवाते हैं।
हर महीने सूरत से लगभग 500 करोड़ रुपये का कपड़ा कोलकाता भेजा जाता है,
जिसमें से करीब 250 करोड़ रुपये का माल बांग्लादेश पहुंचता है।
लेकिन पिछले एक महीने से हालात ऐसे हैं कि पूरा चक्र पूरी तरह ठप पड़ा है।
माल भेजा जा चुका है…
लेकिन भुगतान अटका हुआ है…
और नए ऑर्डर की तो बात ही छोड़ दीजिए।
डीजीएफटी के आंकड़े भी हालात की गंभीरता बयां कर रहे हैं।
गुजरात से बांग्लादेश को करीब 2600 करोड़ रुपये का निर्यात होता है,
जिसमें से सूरत का हिस्सा लगभग 1200 करोड़ रुपये के मैनमेड फैब्रिक का है।
और यही सेक्टर आज सबसे ज्यादा संकट में है।
व्यापारियों का कहना है कि
बांग्लादेश में लंबे समय से चल रही अराजकता के चलते
कोलकाता के जरिए होने वाली सप्लाई पूरी तरह बंद हो चुकी है।
सबसे बड़ी चिंता यही है कि
जो माल पहले ही भेजा जा चुका है, उसका भुगतान आखिर कब और कैसे मिलेगा?
कारोबार ठप…
पेमेंट फंसे…
और पूरे टेक्सटाइल सेक्टर में अनिश्चितता का माहौल…
सूरत का कपड़ा उद्योग अब सरकार और संबंधित एजेंसियों से
तत्काल हस्तक्षेप और समाधान की उम्मीद लगाए बैठा है,
ताकि इस संकट से बाहर निकलने का कोई रास्ता निकाला जा सके।




