
उत्तराखंड से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज़ खबर…
धर्म की आड़ में अपराध करने वालों पर सरकार का करारा प्रहार!

राज्य में चला है ‘ऑपरेशन कालनेमि’, और इस ऑपरेशन ने मचा दिया है हड़कंप।
तीन ज़िलों में एक साथ हुई बड़ी कार्रवाई…
511 लोगों की गिरफ्तारी…
और चौंकाने वाली बात ये कि इनमें 19 बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं।
सरकार साफ कह रही है—
अब आस्था की आड़ में कोई खेल नहीं चलेगा!
उत्तराखंड… देवभूमि…
जहां श्रद्धा, विश्वास और आस्था सदियों से लोगों की जीवनशैली रही है।
लेकिन इसी आस्था की आड़ में कुछ लोग लंबे समय से धोखाधड़ी, ठगी और अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।

इन्हीं नकाबपोश अपराधियों के खिलाफ शुरू हुआ ‘ऑपरेशन कालनेमि’—
नाम उसी असुर के नाम पर, जिसने साधु का भेष धरकर छल किया था।
पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने
तीन जिलों में एक साथ दबिश दी।
साधु-संत, तांत्रिक, फकीर, ज्योतिषी और धार्मिक गुरुओं के वेश में घूम रहे लोगों की सघन जांच की गई।
आधार कार्ड, पहचान पत्र, वीज़ा और अन्य दस्तावेज़ खंगाले गए।
और यहीं से खुलने लगी फर्जीवाड़े की परतें।
511 गिरफ्तारियां।
इनमें से कई लोग बिना किसी वैध पहचान के रह रहे थे।
सबसे गंभीर खुलासा—
19 बांग्लादेशी नागरिक, जो अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कर
धर्म और आस्था को हथियार बनाकर लोगों को ठग रहे थे।
यानि सवाल सिर्फ क़ानून व्यवस्था का नहीं,
बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक विश्वास का भी है।
सरकार का साफ संदेश है—
जो भी धर्म की आड़ में अपराध करेगा,
चाहे वो किसी भी वेश में क्यों न हो,
उस पर कार्रवाई तय है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक,
इस अभियान का मकसद किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं,
बल्कि आस्था को बदनाम करने वालों पर लगाम लगाना है।
ऑपरेशन कालनेमि आगे भी जारी रहेगा।
अन्य जिलों में भी इसी तरह की सख़्त कार्रवाई की तैयारी है।
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है।
लोगों का कहना है कि
फर्जी बाबाओं और ढोंगी तांत्रिकों की वजह से
सच्ची आस्था भी सवालों के घेरे में आ जाती है।
उत्तराखंड में अब नकाब उतर रहे हैं।
धर्म की आड़ में पल रहे अपराधियों की पहचान हो रही है।
और ऑपरेशन कालनेमि बन चुका है
ढोंग, धोखे और अवैध घुसपैठ के खिलाफ एक बड़ा हथियार।




