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थलापति ने कचरे में फेंकी अडानी की ₹20,000 करोड़ की स्मार्ट मीटर योजना !

तमिलनाडु सरकार (TVK) द्वारा अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस की लगभग ₹20,000 करोड़ की 'स्मार्ट मीटर' परियोजना को रद्द करने का मुख्य कारण कंपनी द्वारा उद्धृत अत्यधिक बोलियां और बढ़ती परियोजना लागत थी。

तमिलनाडु सरकार (TVK) द्वारा अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस की लगभग ₹20,000 करोड़ की ‘स्मार्ट मीटर’ परियोजना को रद्द करने का मुख्य कारण कंपनी द्वारा उद्धृत अत्यधिक बोलियां और बढ़ती परियोजना लागत थी。

विस्तार से पूरा मामला इस प्रकार है:

1. टेंडर रद्द होने का कारणतमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन (TANGEDCO) ने अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस (AESL) द्वारा मांगे गए अत्यधिक मूल्यों के कारण टेंडर को रद्द कर दिया。 हालांकि कंपनी पैकेज-1 के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली थी (जिसमें 8.2 मिलियन स्मार्ट मीटर लगाने थे), फिर भी दरों को कम करने में विफल रहने पर टेंडर वापस ले लिया गया。

2. विवाद और आरोपयह पूरा टेंडर केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत शुरू किया गया था。 राज्य सरकार और विपक्षी दलों ने शुरू से ही इस बात पर चिंता जताई थी कि यह योजना उपभोक्ताओं पर भारी अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालेगी。

3. थलापति (विजय) की भूमिकाथलापति विजय (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री) ने कॉर्पोरेट मोनोपोली और आम जनता पर पड़ने वाले अनुचित बोझ का कड़ा विरोध किया है। उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद, इस विशाल परियोजना को जनता के हित में और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ड्रॉप (स्थगित/रद्द) कर दिया गया。

4. राजनीतिक प्रतिक्रियाइस कदम के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष (जैसे बीजेपी) का मानना है कि इस तरह के बड़े बुनियादी ढांचे और सुधारों को रोकना राज्य को वित्तीय नुकसान की ओर धकेल सकता है, जबकि सत्ता पक्ष का तर्क है कि आम नागरिकों के हित corporate लाभ से ऊपर हैं。

 

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थलापति ने कचरे में फेंकी अडानी की ₹20,000 करोड़ की स्मार्ट मीटर योजना

तमिलनाडु सरकार ने अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस की ₹20,000 करोड़ की स्मार्ट मीटर योजना को रद्द कर दिया है।

सरकार का कहना है कि यह योजना जनता पर बोझ डालने वाली और अपारदर्शी थी। थलापति (विजय) ने इस फैसला को समर्थन करते हुए इसे जनता की जीत बताया।

स्मार्ट मीटर योजना क्या थी? पूरे तमिलनाडु में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना कथित तौर पर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त खर्च का बोझ

डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर भी उठे थे सवाल

सरकार ने जांच के बाद योजना को रद्द किया

लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ता अतिरिक्त बोझ टला

सरकार ने पारदर्शिता और जनहित को बताया प्राथमिकता

थलापति विजय ने जनता की आवाज उठाई

सोशल मीडिया पर जनता ने फैसले का स्वागत किया और थलापति विजय को धन्यवाद दिया

थलापति का संदेश

” जनता का पैसा जनता के काम आएगा, किसी उद्योगपति की जेब भरने के लिए नहीं। थलापति विजय

पारदर्शिता, जनहित और जवाबदेही के लिए थलापति का संकल्प जनता के साथ, जनता के लिए।

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